Search This Blog

Original Stories by Author (36) : Desparate Kumar

कहानी 36:
Desperate कुमार बचपन से सिंगल थे। माने पूरे हॉस्पिटल में उस दिन ये ही पैदा हुए थे। अपने माता पिता की single औलाद, स्कूल के Farewell से लेकर कॉलेज के Freshers तक भी इनकी singularity पर कोई आंच नही आई। और तो औऱ इन्होंने पीएचडी भी Singleton sets of singularities of Single Black Bodies पे की । कई बार तो जन्मदिन में मोमबत्ती भी एक ही जलाई जाती थी। नाना प्रकार के गुणों के बावजूद भाई साहब के जीवन मे कमी थी सिर्फ Mrs. खिलाड़ी की।
फेसबुक पर कई बार फेसबुक ने ब्लॉक किया, Tinder ने इनका एकाउंट ही डिलीट करके ब्लैक लिस्ट में डाल दिया। सुनने में आया कि orkut इन्ही की वजह से बंद कर दिया गया। हाल फिलहाल भाई साहब के जीवन का सूखा तब जा के खत्म हुआ जब बेहद मासूम चेहरे की मल्लिका ब्रेकपशुदा कन्या इन्हें मध्यस्थता न्यायालय की सीढ़ियों पे बैठी विलाप करते हुए मिली। भाई साहब को अपने सिंगल होने का शाप खत्म करना था और मोहतरमा को कंधा चाहिए था। Demand Supply का curve एक पॉइंट पे मिल गया। पीछे कोई आवाज आई लेकिन दिमाग मे Dopamine का लेवल बढ़ जाये तो कौन ध्यान दे। मुलाकातों, movies, मौसम इत्यादि 'म' युक्त घटनाओ का दौर शुरू हुआ। बात learning से permanent लाइसेंस तक पहुंची कि तभी झगड़े, झाम इत्यादि 'झ' युक्त घटनाओ ने 'म' की जगह लेली। एक दिन वो भी आ गया जब भाई साहब को "तुम सारे एक ही जैसे होते हो" का फाइनल ताना सुनने को मिला। दोनों सुलह करने मध्यस्थता न्यायालय पहुंचे जहां नतीजा सिफर निकला। Desperate कुमार जी Disappoint हो के बाहर निकल ही रहे थे कि तभी उन्होंने उसी कन्या को न्यायालय के बाहर सीढ़ियों पर रोते हुए किसी सज्जन को अपनी व्यथा बताते देखा। उन्होंने जोर से चिल्ला के कहा "अबे फस जाएगा" लेकिन तब तक मोहतरमा और सज्जन एक दूसरे का हाथ थामे अपनी डगर पे निकल चुके थे। सुना है श्रीमान desperate कुमार ने पुनः PhD के लिए अप्लाई किया है लेकिन इस बार subject जरा हट के है - How singularity is better than an anomaly in Lorentz Transformation"
--Nilesh Mishra


Previous
Next Post »